मंगलवार, 3 जून 2008

कुर्यात सदा मंगलम

प्रस्तावना -
साहित्य समाज का दर्पण है,सम्प्रति "कुर्यात सदा मंगलम "के मध्यम से हलबा समाज के वैवाहिक -सांस्कृतिक क्रियाकलापों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। परिवर्तन के दौर मे बाहय शक्तिया अतिक्रमण कर सभ्यता और संस्कृति को प्रदूषित करने का भरसक प्रयास करती है,ऐसे समय मे अपनी सभ्यता और संस्कृति का समुचित ज्ञान ही अस्तित्व की रक्षा मे सही मददगार हो सकते है। स्वामी विवेकानन्द का कथन है"know thy self" अर्थात अपने आपको जान लेने के पशत ही व्यक्ति परिवार और वृहत समाज की पहचान कर पता है ।
अस्तु यह लेख नौनिहालों को समर्पित है,जिनके ऊपर समाज का भरपूर विश्वास है कि वे परिवार व समाज का कुशल नेतृत्व कर अपने उत्तरदायित्व का सही निर्वहन करेंगे।
मनौद मन्नुलाल ठाकुर
अक्षय तृतीया
२००८
कुर्यात सदा मंगलम
पोस्ट मेन,पोस्ट मेन !
चीनू भाई कहानी सुनने मे तल्लीनता से लगा हुआ था,पोस्ट मेन की आवाज सुनकर हमने चीनू भाई से कहा "चीनू भाई जरा देखो तो पोस्ट मेन आया है ,दौड़कर जाओ!
छह वर्षीय चीनू भाई क्लास २ का छात्र है,शहर मे पढता है ,अवकाश मिलने पर वह बिना नागा किए ,दादा दादी से मिलने गाँव आ जाता है। ऐसे ही वग गाँव आया हुआ था और दादाजी से अपनी मनपसंद कहानिया सुनने मे लगा हुआ था। चीनू चहकते हुए वापस आया उसके हाथ मे शादी का निमंत्रण पत्र था , जोशीले स्वर मे चिल्लाकर बोला "दादा जी आपके लिए बिहाव का नेवता आया है।" हमने पूछा तुम्हे कैसे मालूम?तो वह बोला "देखो तो सही,इसमे लिखा है शुभ विवाह ,मैंने ठीक कहा ना !"
"हा भाई ,आपने बिल्कुल ठीक कहा !" कुछ पल सोचने के बाद चीनू दार्शनिक अंदाज मे पूछता है"दादाजी ये विवाह क्या होता है और क्यो होता है?" हमने कहा "चीनू भाई पहले ये बताओ ,तुम्हारी कहानी अधूरी है,उसे पुरी करू या या विवाह के बारे मे बताऊ !"चीनू बोला "दादाजी,कहानी तो सुनते रहते है.पहले आप विवाह के बारे मे बतलाइए !"ठीक है ,हम आपको विवाह के बारे मे ही बतलाते है,मगर हा,एक शर्त पर!" क्या है वो शर्त ?यह की आप सोना मत!"यह कहानी थोडी न है की मै कहानी सुनते २ ही सो जाऊ ,आप बताओ तो सही!
चीनू ६ साल का बालक है उसकी बाल -सुलभ जिज्ञासा को देखकर मेरा भी मन उसकी जिज्ञासा के लहराते पोधो मे जल सिंचन का होने लगा हमने निश्चय कर लिया की आज चीनू को विवाह का सारा ज्ञान -कलेवा अवश्य परोसा जावे
चीनू भाई सुनो यह प्रकृति का सास्वत नियम है दो अनजान युवक ओउर युवती प्रकृति के विकाश क्रम मे अपना सहयोग प्रदान करने हेतु परिवार ओर समाज की सहमती और सानिध्य मे परिणय सूत्र मे बंध जाते है और आजीवन एक दुसरे का साथ निभाने का संकल्प लेते है उसे मंगल परिणय कहते है विवाह एक संस्कार है समझोता नही और सही से व्यक्ति के गृहस्थ जीवन की शुरुवात होती है
दादा जी आपकी यह बात कुछ -कुछ मेरी समझ मे तो आ रही है , पूरी नही खैर कोई बात नही जब बड़ा हो जाऊँगा ,तो सब समझ जाऊंगा अच्छा या बतलाईये विवाह कब करना चाहिए चीनू भाईआपने बहुत ही सुंदर सवाल पूछा है ।
मै बहादूर बच्चा हूँ न , बहादूर बच्चे हमेशा अच्छी बात करते है और अच्छा सवाल ही पूछते है --------- बातो ही बातो मे टालिए मत , मैंने जो पूछा है वह बतलाइए ! हाँ चीनू भाई सुनो सरकार के नियमानुसार लड़कियों के लिए १८ वर्ष और लड़को के लिए २१ वर्ष विवाह हेतु न्यूनतम आयु निर्धारित है।
यह तो सरकार का नियम है आप भी तो बुजुर्ग है अनुभवी है ज्ञानवान है आप क्या सोचते है आप अपना विचार भी बतलाइए न चीनू कहने लगा । चीनू भाई हमारा ख्याल है लड़कियों की शादी २५ वर्ष से पूर्व ना हो पूर्ण परिपक्वता आने पर ही विवाह होने पर स्वस्थ संतानों की उत्त्पति होगी तथा इस आयु के पश्चात् विवाह होने पर यूवक भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रोजगार के क्षेत्र मे आत्म निर्भर हो जावेगे । बढती हुई जनसँख्या को भी नियंत्रित करने मे मदद मिलेगी ।
हा दादा जी कच्चा आम खट्टा होता है और अच्छा सा पका आम स्वादिष्ट । ---- मैंने ठीक कहा न !
बिल्कुल ठीक कहा !
दादा जी, आपने विवाह और विवाह के लिए उचित आयु की जानकारी दी अब विवाह कैसे होता है , दो अंजन यूवक और यूवती एकाएक परिणय सूत्र मे कैसे बंध जाते है ये सब जानने के लिए मेरा मन मचल रहा है आप सारी बातें विस्तार से बतलाइए ।
चीनू भाई , समाज काफी विस्तृत और व्यापक है ,यह दूर दूर तक तक फैला हुआ है ,परिवार उसकी एक इकाई है समाज मे पारिवारिक नाते रिश्तो का ताना बना फैला हुआ है ,समाज के लोग नाते रिश्तो को जोड़ने मे एक दूर की मदद करते है संपर्क माध्यमो से विवाह का प्रस्ताव रखते है सामाजिक सम्मेलनों मे विवाह योग्य यूवक युवतियों का परिचय कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिससे लोगो को वांछित वर वधु तलाशने मे मदद मिलती है
दादा जी यह बतलाये रिश्ता तय करने मे किन किन बातो का ध्यान रखा जाता है ?
चीनू भाई , हल्बा आदिवासी समाज की अपनी अलग पहचान है और इस पहचान को बनाये के लिए हल्बा समाज कटिबध्द है। सर्वप्रथम रिश्ता का पहल गोत्रज से प्रारम्भ होता है लड़की और लड़का के दोनों के माtri पक्ष